Sunday, February 24, 2019

ध्यान

उसने पूछा
कुछ शुभकामनाएं उधार मिलेंगी?
मैंने कहा
क्या करोगी उधार की शुभकामनाओं का?
उसने कहा
किसी को उधार देनी है
मैंने कहा
मैं किसी से उधार नही मांग सकता
वरना तुम्हें देता जरूर।
**
उसने कहा
तुम हँसते हुए अच्छे लगते हो
मगर अच्छे लगने के लिए
कभी हँसना मत
मैंने कहा
मुझे कम हँसना पसन्द है
उसने कहा
मुझे भी तुम थोड़े कम पसन्द हो।
**
चाय का कप थमाते
उसने कहा एक बार
पता है चाय किस चीज़ से
अच्छी बनती है?
मैंने कहा
शायद ध्यान से!
उसने हंसते हुए कहा
नही लापरवाही से।
**
मृत्यु पर शोक न हो
क्या ऐसा सम्भव है?
उसने पूछा एकदिन
मैंने कहा सम्भव है
बस उसके लिए
पहले मरना जरूरी है।

©डॉ. अजित

3 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

सुन्दर

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन कुछ बड़ा हो ही गया : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

Onkar said...

बहुत बढ़िया