Wednesday, July 26, 2023

सब्र

 

हम एक गलत वक़्त पर मिले
दो सही लोग थे

सही किसी योग्यता की दृष्टि से नहीं
बल्कि हम एक दूसरे के पूरक जैसे दिखते थे

यह दिखना दूर तक साथ रहा मेरे
शायद अंतिम सांस तक

जब मृत्यु आई और उसने कहा-चलो !
मैंने उसका ठंडा हाथ थामा और कहा
अपने भाई जीवन से कहना एक बात

उसे मेरे पास देर से आना था
दस-बारह बरस पहले आया 

वो मेरे पास

इस पर मृत्यु
बस मुस्कुराई और बोली
अधूरे प्रेमियों को ले जाने में मेरे कंधे दुखते हैं

मैं उसके साथ चल पड़ा चुपचाप
जब पीछे मुड़कर देखना बंद किया मैंने

तब उसने कहा
तुम मिलने के लिए नहीं बने थे
तुम एक दूसरे को मिलाने के लिए बने थे

इसलिए तुम्हारा संदेश मैं छोड़ आई हूँ नीचे

इसी के भरोसे आएगा किसी को
धीरे-धीरे सब्र।

© डॉ. अजित

Friday, July 21, 2023

आना

 

मैं आऊँगा भोर सपने की तरह

मैं आऊँगा गोधूलि की थकन की तरह

मैं आऊँगा डाक के बैरंग खत की तरह


मैं आऊँगा अचानक मिले दुख की तरह

और ठहर जाऊंगा

मन के सबसे सुरक्षित कोने में


मेरी शक्ल सुख से मिलती है

मगर नजदीक आने पर बदल जाती है

यह शक्ल


मैं आऊँगा बिन बुलाए भी एकदिन

और तुम्हें हैरानी नहीं होगी


मैं इतना ही खुला हूँ

जितना बंद हूँ


तुम जिस दिन पढ़ना शुरू करोगी

मैं हो जाऊंगा याद किसी लोकगीत की तरह

जिसे तुम गुनगुनाया करोगी

उदासी और एकांत में


मैं पूरा याद नहीं रहूँगा

इसलिए मैंने आना हमेशा रहेगा

आधा-अधूरा


जिसे सोच तुम मुस्कुरा सकोगी

अकारण भी।

©डॉ. अजित