Monday, May 25, 2026

शिकायत

शिकायत 

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जो आदमी शिकायत रखता है 

उसकी शिकायत रखने से भी 

शिकायत होने लगती है प्रियजन को 


भूलने वाले याद दिलाने को 

मानने लगते हैं खराब आदत


आदतें बनती चुपचाप हैं 

और बिगड़ती हैं  गहरा शोर करके  


आदमी खिसकता हुआ एकदिन 

खुद वहां पाता है 

जहाँ से नीचे देखकर डर लगता है 

और ऊपर देखने पर कुछ दिखता नहीं है 


एक ही धरती के कई गुरूत्वाकर्षण होते हैं 

इसलिए किसी के दिल से गिरकर 

आदमी हमेशा पैरो में नहीं पड़ता 


वो विलीन हो जाता है 

किसी दूसरे सौरमंडल में 

बिना किसी चमक के 

एकदम अकस्मात. 


©डॉ. अजित

Saturday, May 16, 2026

अकर्मक

 उससे किसी ने आग्रह न किया

कि बने रहो उसके जीवन में


उसके बिना किसी की शाम उदास न थी


वो जरूर उदास रहा 

सुनकर वे सब किस्से 

जिसमें मनुष्य निरुपाय दिखता था


उसे कहा गया प्रिय

मगर वो अतिप्रिय कभी न था


उसके बिना सबका चल जाता था काम


वो सम्बंध को बचाने को एक काम समझता रहा

और जीवन उसे नकारा सिद्ध करने पर तुला था


उसकी याद देर तक पीछा न करती थी

उसकी यादें जल्द हो जाती थी धूमिल


उसका जिक्र कभी नेपथ्य में नहीं होता

वो अतीत वर्तमान और भविष्य का पात्र न था


उसका कोई समय न था

उसे कहा जाता तुम्हारे हजार खून माफ़ हैं


मगर पहले ही खून पर

उसे सुना दी जाती सजा ए मौत


उसके बिना किसी की दुनिया न रुकती थी

वो जरूर रुक-रुक कर देखता था

दुनिया का यूँ रुकना।


©डॉ. अजित