Sunday, June 19, 2022

वे पिता थे

 पिता न नायक थे

न खलनायक


पिता केवल पिता थे


उनके साथ 

अच्छी यादें कम जुड़ी थी मेरी


फिर भी उनके जाने के बाद

मुझे याद रही 

केवल उनकी अच्छाई 


बहुत भावुक होकर 

नहीं सोच पाता पिता को लेकर 

आज भी मैं


पिता भी एक मनुष्य थे

तमाम ऐब खूबी के साथ 

उन्होंने जिया अपना भरपूर जीवन


पिता की याद धुंधली पड़ने लगती है

एक समय के बाद

हो सकता है यह मेरा निजी व्यक्तित्व दोष हो


पिता अच्छे या बुरे नहीं थे

'वे पिता थे'

यह एक सम्पूर्ण वाक्य है

जो भूला देता है

पिता से जुड़ी तमाम शिकायतें 


पिता होते तो 

शायद यह कविता न होती


यह कविता है

तो पिता नहीं हैं


यह एक त्रासद बात है

जो समझ सकता है

प्रत्येक पिता।


©डॉ. अजित

कुलदेवता

 पूर्व प्रेमियों से

कोई ईर्ष्या नहीं होती थी उसे


कभी कोई प्रतिस्पर्धा नहीं महसूसता था वो 

किसी अन्य के पुरुषार्थ बखान पर 


उसकी नहीं थी अतीत में

लेशमात्र भी दिलचस्पी


वो साक्षी भाव का श्रोता था 

प्यार,मनुहार और तकरार के किस्सों का


वह प्रेमी नहीं था

वह दोस्त भी नहीं था शायद


दोस्त और प्रेम के मध्य 

किसी स्थान का कुलदेवता था वो


जहां रस्मन रुका जाता

दिक्कतें बताई जाती

पश्चाताप किया जाता

और एक उम्मीद बंधती थी कि


एक दिन सब ठीक हो जाएगा


उसके हिस्से आया था

सुनना, और वो सुनाना 

जो सुना नहीं जाता प्राय:


अपात्र,कुपात्र,सुपात्र के अलावा 

उसका था अपना एक मौलिक पात्र 


जिसमें प्रेम का करके छायादान 

प्रेमी और दोस्त पाते थे राहत 


दुश्मन करते थे उस पर रश्क़ 


देवता की शक्ल में 

वो था इतना मामूली कि 

उसे देख उसके ऐसा होने पर होता था सन्देह


और वो कहता था एक ही बात

ऐसी बात नहीं है


'दरअसल तुम समझे नहीं'


©डॉ. अजित


Sunday, June 12, 2022

अचानक गायब हुए लोग

 कोई अचानक से

गायब नहीं होता है

ऐसा लगता जरूर है कि

अचानक से गायब हो गया कोई 


गायब होना एक क्रमिक प्रक्रिया है

जो होती है घटित बहुत धीमे-धीमे 


अचानक से गायब हुए लोग

अक्सर आते हैं याद गाहे-बगाहे


उन्हें करते हए याद 

हम हो जाते है उदार प्राय:


कोई जब अचानक से होता है गायब

हम ढ़ोते हैं एक कोरा विस्मय 

करते है अनजान होने का अभिनय 


अचानक से गायब हो जाना 

हमें दिलाता है किसी की याद

हम होते हैं थोड़े शर्मिंदा 

अपनी पकड़ पर


गौर से देखिए 

मिल जाएंगे अचानक से गायब हुए लोग

हमारे आसपास


अचानक से गायब हुए लोगों को 

नहीं तलाशा जा सकता है 

वे अवस्थित हो जाते हैं

ऐसे निर्जन स्थान पर 


जहां से 

वे हमेशा देख सकते हैं हमें

और हम नहीं


मृत्यु और अचानक से गायब होने का

यह बुनियादी भेद बताता है हमें 

कि

किसी के अचानक से गायब होने की 

एक वजह होते हैं हम भी।


©डॉ. अजित

Friday, June 10, 2022

मोक्ष

 प्रेम में उसका चुनाव

विकल्पहीनता का परिणाम था

उसे पात्र कहा गया

मगर बरकरार रही सुपात्र की चाह


वो एक अच्छा विकल्प था

मगर विकल्प कभी अच्छा नहीं होता

यह बात जानते थे दोनों


उसने कभी बताया नहीं

मगर वो चाहती थी उसका 

एक नूतन संस्करण 


निःसन्देह यह कोई खराब चाह भी न थी

मगर कामनाएं अतृप्त रहती है प्राय: प्रेम में 


वे दोनों टकरा गए थे जिस महूर्त पर 

नहीं मिलता था उसका विवरण 

किसी मार्तंड पंचांग में


उनका टकराना 

एक दुर्लभ खगोलीय घटना न थी

जिसके लगाया जा सके 

भविष्य का अनुमान


मगर वे विश्लेषण से मुक्त होकर

रोज करते थे कुछ वायदे खुद से 

नहीं बताते थे एक दूसरे से कुछ बात 


प्रेम में संकल्प बनते बनते रह गए था वो 

विकल्प होने की यह सबसे बड़ी बाधा थी 


विकल्प और संकल्प के मध्य

सब कुछ बुरा ही बुरा नहीं था 

उनकी बातों का यदि किया जाए भाष्य 

तो दीक्षित हो सकते थे कई प्रेमी युगल एकसाथ


उनकी कामनाओं का नहीं किया जा सकता था अनुवाद 

वे लिपि और भाषा की सीमाओं कर गए थे उल्लंघन 


उनके पास  नहीं थी कोई योजना

नहीं थे भविष्य के साझा स्वप्न

वे कहते रहे दिन को दिन

और रात को रात 


प्रेम में किसी का विकल्प होना 

अधूरे संकल्प के जैसा था कुछ-कुछ 


जो मरते वक्त आता था याद

और देह छोड़ देती थी मोक्ष की कामना


उस प्रेम का यही था एकमात्र मोक्ष।


©डॉ. अजित


Wednesday, June 8, 2022

ताप

 सबसे मुश्किल दिन

इसलिए भी मुश्किल थे

तुम अनुपस्थित थी 

उन दिनों में


विराट एकांत से भरी रातों में

सबसे बड़ा भय अकेलेपन का नहीं था

जो डर था, वो इतना छोटा था

मगर तुमसे कभी बताया न जा सका


दुःखों पर बात करते-करते

हम ऊब गए थे प्रेम की 

कोमल बातों से भी 


इस बात पर मेरे दुःख खुश नहीं थे


विकट तनावों के मध्य 

एक तनाव तुम्हें खोने का भी था

जिसका उपचार नहीं जानता था मैं 


'दो असफल लोग कभी मित्र नहीं हो सकते'

यह उक्ति आती थी बार-बार याद

मैं पढ़ता था इसे करके संशोधित 

मैत्री और प्रेम की परिभाषाओं के अनुसार 


जीवन की यातनाओं से लड़ते हुए 

आती थी तुम्हारी हुलस कर याद 

बावजूद इस जानकारी के

तुम्हें संघर्षरत व्यक्ति के बखान से थी चिढ़


तुम्हारी अनुपस्थित का किया

मैंने विलुप्त भाषाओं में अनुवाद

तुम्हारी अनुपस्थिति में मुझे याद आयी 

भूली हुई लिपियाँ


तुम्हारी अनुपस्थिति की लिखावट को

शायद ही पढ़ सकेगा कोई 


यदि पढ़ पाया कोई तो

वो बता सकेगा मेरे बाद कि

जब-जब तुम अनुपस्थित थी जीवन में

जीवन में अनुपस्थित था

भाषा का सौन्दर्य

आत्मा का ताप

और थोड़ी करुणा थोड़ा प्यार।


©डॉ. अजित