Thursday, April 14, 2016

मदहोशी

एकदिन उसने कहा
तुम्हारी आँखें सूँघनी है
मैंने कहा क्यों
लगता है पी कर आए हो
मैंने कहा उसके लिए तो मुँह सूंघते है लोग
वो बोली नही
नशा तुम्हारी आँखों से महकता है
फिर उसनें अनामिका और तर्जनी
दोनों आँखों पर फेरी
ठीक उतनी सावधानी से
जैसे कोई माँ अपने बच्चे की आँख में
काजल लगाती है
उसके बाद वो रूआंसी होकर बोली
कितने रातों से ढंग से सोए नही तुम?
मैंने कहा शराब की महक आई?
बोली नशा केवल शराब का नही
अधूरे खवाबों का भी होता है
फिलहाल तुम्हारी आँखों में वही दहक रहा है
मैं हंस पड़ा
वो रो पड़ी
और नशा दोगुना हो गया
कुछ कुछ ऐसी थी हमारी मदहोशी।

©डॉ.अजित

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