Sunday, February 7, 2010

आग्रह

अक्सर
तुमने कही गई बातों
को एक श्रृंखला के साथ याद रखा
जो अक्सर सन्दर्भ के साथ
तुम प्रस्तुत भी करती हो
लेकिन क्या कभी तुमने यह
नही जानना चाहा कि
इतने कहे गये के बीच
कुछ अनकहा भी हो सकता है
जिसके लिए उपयुक्त अवसर न मिला हो
ऐसा बहुत बार हुआ है कि
मैने जो सोचा वो कहा नही
और जो कहा वो सोच कर नही कहा
जिसे क्षणिक उत्तेजना मानकर
मैने छोड दिया था यू ही
आज मैने देखा उस हर बात एक अर्थ था
एक ऐसा अर्थ जो समर्थ न हो सका
ऐसी अनकही बातो पर मै एक लम्बा चौडा पत्र
लिख सकता हू
पत्र ही नही
और भी बहुत कुछ लिखा जा सकता है
कविता,कहानी या गज़ल
ऐसी तमाम अनकही बातो पर
मै बेवक्त बात करना चाहता हू तुमसे
बिना तुम्हारे मूड की परवाह किए हुए
शायद तुम बहुत सी बातो पर चौंक जाओ
और कहो पहले क्यों नही बताया
हो सकता तुमको ये सब बोझिल लगे
एक चिड-चिडी शाम की तरह
या मै भी बेतुका लग सकता हूँ
मै कहूंगा और रस के साथ कहूंगा
वे सब अनकही बातें
जो मुझे कभी बैचेन करती है
कभी एक राहत भी देती है
और फिर मेरी सब से बडी
जिज्ञासा तो इन बातो के साथ
तुम्हारा मन टटोलने की है
चलो एक शाम अपनी अपनी
अनकही बातो से रोशन करके देखें
शायद फिर यह अधेंरा छट जाए
जिसमे हम
एक दूसरे को ठीक
से देख नही पा रहे हैं
इस बात पर विचार करना
आग्रह है मेरा...।
डॉ.अजीत

2 comments:

Amitraghat said...

"आप खूब सोचते हैं,ढेर सारा लिखते हैं पर आपने कभी हथछोया के बारे में नहीं लिखा कभी हरिद्वार के बारे में नहीं लिखा"?
प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

Amitraghat said...

...हाँ,आपकी कविताओं के माध्यम से मैं जानना चाहता हूँ आपकी जन्मभूमि को आपकी कर्मस्थली को वहाँ के जनजीवन को उसके सौन्दर्य को क्योंकि स्थान का प्रभाव कवि के ऊपर पड़ता ही है । और एक बात कि वाकई आप बेहद अच्छा लिखते हैं ..."