Friday, May 17, 2019

अधूरी बातें


हमारी कुछ बातें
हमेशा अधूरी ही रही
हम निष्कर्षों को टालते रहते

अधूरेपन के साथ जीना आसान था
निष्कर्षों के साथ मुश्किल
अधूरी बातें उम्मीद जगाती थी
और पूरी बातें हमेशा के लिए खो जाती थी

उसके हाथों की लकीरों में
कुछ ऐसी मारकाट थी
जैसे किसी युद्ध का अमूर्त चित्र  ईश्वर ने
संरक्षित कर दिया हो उसकी हथेली पर

उसका हाथ देखते हुए
होती थी दुनिया से युद्ध लड़ने की हर बार
मगर वो हमेशा देखती मेरा हाथ
लेती मेरी रेखाओं की प्रतिलिपि
अपने माथे पर

ऐसे करते हुए उसकी आँखों में पढ़ी
जा सकती थी एक बात
वही बातें अधूरी अच्छी लगती है
जो पूरी हो सकती हो मगर
न की गई हो पूरी.

© डॉ. अजित  


3 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

सुन्दर

Onkar said...

बहुत बढ़िया

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन निगेटिव में डंडा घुसा कर उसे पॉजिटिव बनायें : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...