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जो आदमी शिकायत रखता है
उसकी शिकायत रखने से भी
शिकायत होने लगती है प्रियजन को
जो आदमी याद दिलाता है
भूलने वाले याद दिलाने को
खराब आदत मानने लगते हैं
लगभग झक्की जैसा
आदतें बनती चुपचाप हैं
और बिगड़ती हैं गहरा शोर करके
आदमी खिसकता हुआ एकदिन
खुद वहां पाता है
जहाँ से नीचे देखकर डर लगता है
और ऊपर देखने पर कुछ दिखता नहीं है
एक ही धरती के कई गुरूत्वाकर्षण होते हैं
इसलिए किसी के दिल से गिरकर
आदमी हमेशा पैरो में नहीं पड़ता
वो विलीन हो जाता है
किसी दूसरे सौरमंडल में
बिना किसी चमक के
एकदम अकस्मात.
©डॉ. अजित
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