Tuesday, February 8, 2011

दुश्मन दोस्त

कुछ शब्द

बुरे वक्त के

अच्छे दोस्त के नाम

और एक धन्यवाद

अच्छे वक्त के बुरे

दोस्त के नाम

लिखकर मै उस राहत

का अनुभव करना

चाहता हूँ जिसका

बोझ ढो रहा हूँ

लम्बे अरसे से

सच तो यह है कि

दोस्त कभी बुरे

नही होते

बुरा होता है वह वक्त

जब कोई अपना लगता है

या फिर पराया

अपने-पराये का ये भेद

दरअसल उस उम्मीदों

के संसार का छलावा है

जिसमे लोग करीब आकर

बिछड जातें हैं और

छोड जातें है एक टीस

ज़िन्दगी भर के लिए

धन्यवाद और शिकायत

के सहारे उनको याद करके

जी भर कर कोसा जा सकता हैं

कुछ पुराने साथियों को

उनकी कुछ अच्छी कुछ बुरी

आदतों के लिए

जिसकी वजह से

हम प्यार के बाद

नफरत करना सीख पायें...।

डा.अजीत

2 comments:

संजय भास्कर said...

आदरणीय डॉ अजीत जी..
नमस्कार
गहरी बात कह दी आपने। नज़र आती हुये पर भी यकीं नहीं आता।

संजय भास्कर said...

बसंत पंचमी के अवसर में मेरी शुभकामना है की आपकी कलम में माँ शारदे ऐसे ही ताकत दे...:)