Sunday, June 8, 2014

रिश्ता

तुमसे मेरा रिश्ता
लाइक से लाइक तक का
खुद से मेरा रिश्ता
कमेन्ट से कमेन्ट तक
दुनिया से मेरा रिश्ता
शेयर से शेयर तक
दोस्त जिन्दगी में टंगे है
टैग की तरह
ये जो स्टेट्स है
कुछ झूठ कुछ शिकायतों
के पुलिंदे भर है
ये जो फोटो एल्बम है
यह खुद को तलाशने की
एक नाकाम कोशिस भर है
सासों से ज्यादा जरूरी है
इंटरनेट का कनेक्शन
सोचा न था
जिन्दगी फेसबुक हो जाएगी
और फेसबुक जिन्दगी।
© डॉ. अजीत

3 comments:

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन सेर और सवा सेर - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

आशा जोगळेकर said...

सचमुच सोचा न था।

Digamber Naswa said...

बहुत खूब .. सोशल मीडिया का दंश या कुछ और ... पर बाखूबी लिखा है सच को ...