Saturday, September 10, 2016

डायरी

उसने दो डायरी मुझे गिफ्ट की
और कहा रख लो तुम्हारे काम आएंगी
मैंने रख ली
बिना किसी ख़ास उत्साह के
उनकी खूबसूरती पर
मैं इस कदर मुग्ध था कि
उन पर लिखकर कुछ भी
उनका सौंदर्य नही खत्म करना चाहता था
इसलिए यहां तक उन पर
अपना नाम भी नही लिखा मैंने
आज भी वो मेरे पास सुरक्षित रखी है
एक डायरी में प्लानर भी है
मैं उसे देखता हूँ तो उदास हो जाता हूँ
दूसरी डायरी में एक कविता लिखना चाहता हूँ
जो कभी प्रकाशित न हो
दोनों डायरियों को देख मुझे
अतीत और भविष्य याद आता है
वर्तमान के भरोसे उन्हे छूता हूँ
और लौट आता हूँ
अब मुझे महसूस होता है
तुमनें मुझे महज दो डायरी गिफ्ट नही की थी
बल्कि दो बातें सौंपी थी एक साथ
मुझे खेद है
मै जिम्मेदारी से उनको बचा न पाया
मन के दस्तावेजों को नष्ट करने का दोषी हूँ मै
कागज़ के भरोसे यदि माफी मिलती तो
सबसे पहले दोनों डायरी तुम्हें लौटाता
गिफ्ट लौटाने के अपशुकन की परवाह किए बगैर
ताकि
कोरी डायरी देख तुम समझ पाती
काल संधि पर खड़े एक शख्स के
मन का कोरापन।

©डॉ.अजित

4 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

वाह बढ़िया ।

विरम सिंह said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 11 सितम्बर 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

Onkar said...

बहुत बढ़िया

संजय भास्‍कर said...

बहुत बढ़िया