Wednesday, November 22, 2017

अकेलेपन की कविताएँ

अकेलेपन की कविताएँ
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मैं इतना अकेला हूँ कि
करवट लेने पर
शरीर का दूसरा हिस्सा
आहत और उपेक्षित महसूस करता है
मेरी मां के अलावा
मेरा बिस्तर जानता है
मेरा ठीक-ठीक बोझ
**
एकांत का अर्थ  दुःख नही
अवसाद भी नही
एकांत का अर्थ
जो निकालते है
वो एकांत से नही
अकेलेपन से पीड़ित है.
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अकेला होना
पहले दुःख लगा
फिर त्रासद
बाद में अकेले में
वैसा लगने लगा
जैसा कभी लगता था
प्रेम में.
**
नितांत अकेला
कम रहा हूँ मैं
मेरा साथ रही है
उसकी स्मृतियाँ
जो मेरे बाद
नही रहा
कभी अकेला
**
मैं अकेला था
इस कथन में है
व्याकरण दोष
अकेला कोई
कभी अकेला नही होता
उसे अकेला समझा जाता है तब
जब वो कहता है
मैं अकेला हूँ
**
कल जब
तुम साथ थी
हम अकेले नही थे
मगर
मैं और तुम थे
दोनों बेहद अकेले.
© डॉ. अजित


4 comments:

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 23-11-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2796 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Dhruv Singh said...

महिला रचनाकारों का योगदान हिंदी ब्लॉगिंग जगत में कितना महत्वपूर्ण है ? यह आपको तय करना है ! आपके विचार इन सशक्त रचनाकारों के लिए उतना ही महत्व रखते हैं जितना देश के लिए लोकतंत्रात्मक प्रणाली। आप सब का हृदय से स्वागत है इन महिला रचनाकारों के सृजनात्मक मेले में। सोमवार २७ नवंबर २०१७ को ''पांच लिंकों का आनंद'' परिवार आपको आमंत्रित करता है। ................. http://halchalwith5links.blogspot.com आपके प्रतीक्षा में ! "एकलव्य"

Onkar said...

सुन्दर रचना

ASHISH AWASTHI said...

मैं अकेला था
इस कथन में है
व्याकरण दोष
अकेला कोई
कभी अकेला नही होता
उसे अकेला समझा जाता है तब
जब वो कहता है
मैं अकेला हूँ


अति सुंदर