एक आग जलती है
सीलन इतनी ज्यादा है
ताप को धुआं निगल जाता है
जलने का मतलब
प्रकाश ही नही होता है हर बार
कुछ आग अंधेरे में भी जलती है
जिसके ताप में
कतरा कतरा पिंघलते जाते है हम
रोशनी की आस में
ताप खो जाता है
खुद ही जलते है और
खुद को ही जलाते है
मन की दहलीज पर
इस आग की अंधी रोशनी होती है
वक्त हमें सेंकता है
अपनी शर्तों पर
समझदारी इसी को
कहते है शायद।
© डॉ.अजीत
सीलन इतनी ज्यादा है
ताप को धुआं निगल जाता है
जलने का मतलब
प्रकाश ही नही होता है हर बार
कुछ आग अंधेरे में भी जलती है
जिसके ताप में
कतरा कतरा पिंघलते जाते है हम
रोशनी की आस में
ताप खो जाता है
खुद ही जलते है और
खुद को ही जलाते है
मन की दहलीज पर
इस आग की अंधी रोशनी होती है
वक्त हमें सेंकता है
अपनी शर्तों पर
समझदारी इसी को
कहते है शायद।
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